
मुरली वाले की मधुर तान
गूंज रही है जन जन में,
मनवा बोले जब राधे राधे
खुशियां छा जाती तन में।
भोर की किरणों के संग
राधे राधे जप ले रे मन,
कान्हा नैया पार करेंगे
बिल्कुल भी न करना चिंतन।
सारी वसुधा गोपाल की मेरे
तेरा मेरा बस झगड़ा है,
सूखी रुखी खा ले दो रोटी
फिर काहे का लफड़ा है।
राधे राधे में ही बंदे
लगा ले मानव अपना मन,
कान्हा पूरी करेंगे इच्छा
सफल हो जाएगा ये जीवन।
कवि संगम त्रिपाठी











