
भगत सिंह, राजगुरु, गुरुदेव की महिमा खूब गाती हूँ।
अपनी नई पीढ़ी में भी देशभक्ति के गुण जगाती हूँ।।
भारत के इतिहास में रचा वह अत्यंत महत्वपूर्ण दिन।
महान् क्रांतिकारियों के शहीद होने पर थे सभी खिन्न।।
भारत माता के लाल सच में थे विश्व में सबसे भिन्न।
कलयुग में भी ऐसे शुभ नाम चाहिए समाज में अभिन्न।।
शहीदों की स्मृति का आज नवरात्रों में दिन आया।
साहस और समर्पण की भावनाओं ने जज़बा जगाया।।
राष्ट्रीय सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित करने हर कोई आया।
इतिहास की याद दिलाने हेतु आज विशेष अवसर है आया।।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कठिनाइयों का अहसास कीजिए।
भारतदेश को युवाओं को भी देशभक्ति के सबक दीजिए।।
ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, सिंह के समान गर्जना करने दीजिए।
अन्याय के खिलाफ़ न्यायोचित को केवल आगे बढ़ने दीजिए।।
शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु मौन धारण कीजिए।
स्नेह-सहानुभूति से ही सांसारिकता का निर्माण कीजिए।।
वीरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट कर लिया कीजिए।
पावन व विशेष धरा पर रहने वालों शुद्धता धारण कीजिए।।
अंत में शहीदी दिवस को हम सभी करते हैं शत्-शत् नमन्।
सदा ही अमर रहेंगे भगत सिंह, राजगुरु, गुरुदेव का वतन।।
शहीदों को हर पल नमन् करने वाली-कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












