
तेइस मार्च उन्नीस सौ इकतीस,
वो यौवन का यूं सागर लहराया।
भगतसिंह,सुखदेव, राजगुरू ने,
हँसते हँसते फाँसी को गले लगाया।।
जब गौरो की इस हुकुमत ने,
लालाजी पर कहर बरसाया।
सांडर्स की हत्या करके वीरों ने,
लालाजी का यूं बदला चुकाया।।
एचएसआरए का गठन किया,
क्रांति का उन्होने बिगुल बजाया।
दिल्ली असेम्बली में बम फेंककर,
हत्या नहीं, उन्हें यूं चुनौती दी थी।।
आजादी के इन रणबांकुरों ने,
फाँसी का फंदा यूं चुम लिया।
आजादी की अलख जगाकर,
गौरों को भारत से बाहर किया।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












