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शहीद दिवस

शहीद दिवस की घड़ी आज
बहने लगी अश्रुओं की धार
क्या वीर थे देश के तुम्ही तीन
भयमुक्त फांसी चद गये वीर
वह खून था अद्भुत अलवेला
जिसने जन्मा अतुलित योध्दा
हंसते- हंसते तुम शहीदों ने
भारत मां पर बलिदान किया
थीं धन्य भूमि जिस पर तुमको
फांसी का फन्दा पहना दिया
मिट्टी भी लिपट के धन्य हुई
जहां पार्थिव शरीर उतारा था
यह धन्य भूमि भारत की है
जिस पर तुमने जन्म लिया
तुम बार- बार बनना बच्चा
जिस माँ का तुमने दूध पिया
डॉ.कृष्ण कान्त भट्ट
एस वी पी सी बेंगलूरु कर्नाटक












