
प्रेम की भावना जगाती प्रकृति,
तेरे स्पर्श से खिल उठती हर कली।
हवा तेरी खुशबू में मदमाती,
फूल मुस्कुराते, प्रेम गुनगुनाती।
नदी बहती तेरी आँखों-सी गहरी,
मन की प्यास बुझाती, प्रेम में डुबोती।
चाँदनी रात में तेरी छाया नाचती,
सितारे झिलमिलाते, प्रेम की रास गाती।
पत्ते सरसराते तेरी मीठी बातें,
बरसात की बूँदें तेरे आँसू बनकर।
सूरज की लाली तेरे गालों-सी लाल,
पर्वत चूमते तेरे अधरों की मिठास।
समंदर की लहरें तेरी बाहें लपटें,
पक्षी उड़ते तेरे संग आकाश में।
वृक्ष खड़े तेरी रक्षा में सजग,
सुबह-शाम प्रेम की भावना रंगती।।
रचनाकार
कौशल












