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सागर को अभिमान है

सागर को अभिमान है कि वह
सारी कायनात को डुबा सकता है:

हाथी समझता है कि उसकी ताक़त
जंगलात व आबादी को रौंद सकती है,
पर एक पिपीलिका जो जमीं पर
रेंगती है हाथी को वश में कर लेती है।

सागर को अभिमान है कि सारी
कायनात को डूबा सकता है,
पर तेल का छोटा सा बिंदु भी
उसमें तैरकर निकल सकता है।

अंधकार को विदीर्ण करने में समय
अक्सर व्यतीत हो ज़ाया करता है,
दूसरों को नीचा दिखाने में सारा
ज्ञान निरर्थक हो ज़ाया करता है।

जब मात्र एक दीपक जलाने से
उजाला सब जगह फैल जाता है,
प्रेम का एक शब्द मात्र अहंकार को
सदा सदा के लिये मिटा जाता है।

हम जीवन में जब कभी किसी से
मिलते हैं, उसका प्रयोजन होता है,
किसी की परीक्षा ली जाती है, तो
कोई हमें अपना मोहरा बनाता है।

कोई तो कभी हमें सीख दे जाता है,
कोई हमसे बहुत कुछ सीख जाता है,
जीवन में हर कदम एक प्रयास होता है,
हर प्रयास का सुखद अनुभव होता है।

जीवन का अनुभव है कि हर इंसान
दूसरे हर इंसान को समझ नहीं पाता है,
और आदित्य हर इंसान दूसरे हर
इंसान को समझ भी नहीं पाता है।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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