जनकनंदिनी की महिमा से गुंजायमान २४६वीं कल्पकथा काव्यगोष्ठी; श्रद्धा, सरसता और साहित्य का अनुपम संगम

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार, सोनीपत हरियाणा की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह ने बताया कि संस्था के सौजन्य से २४६वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी का भव्य आयोजन जय माँ जानकी विषय पर अत्यंत श्रद्धा एवं साहित्यिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन भक्ति, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना का सजीव उदाहरण बनकर उभरा, जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुतियों से जनकनंदिनी माँ जानकी के दिव्य चरित्र का भावपूर्ण चित्रण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र के बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे जी द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित कर दिया।
काव्यगोष्ठी के दोनों चरणों का मंच संचालन आशुकवि भास्कर सिंह ‘माणिक’ एवं डॉ. श्याम बिहारी मिश्र द्वारा अत्यंत कुशलता एवं प्रभावपूर्ण शैली में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कोशीकलां, मथुरा उप्र की सुप्रसिद्ध साहित्यकार योगेश्वरी भारद्वाज ‘रेखा’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में तखतपुर, बिलासपुर छत्तीसगढ़ के विद्वान साहित्यकार दिनेश कुमार दुबे की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को द्विगुणित किया।
इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों से जुड़े साहित्यकारों – सुरेश कुमार वर्मा ‘रातावाल’, कीर्ति त्यागी, शोभा प्रसाद, पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, ज्योति प्यासी, डॉ. राजेश तिवारी ‘मक्खन’, नन्दकिशोर बहुखंडी, रमापति मौर्य, रेखा भारद्वाज योगेश्वरी, दिनेश कुमार दुबे, विजय रघुनाथराव डांगे, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, पवनेश मिश्र सहित अन्य रचनाकारों ने माँ जानकी के त्याग, तप, मर्यादा और करुणा को अपने काव्य में सजीव करते हुए श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम लगभग पाँच घंटे से अधिक समय तक दो चरणों में निरंतर संचालित हुआ। इसकी विस्तृत सूचना संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह द्वारा प्रदान की गई। समापन सत्र में राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वातावरण में राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के अवसर पर सामूहिक गायन किया गया, जिससे समूचा परिवेश राष्ट्रप्रेम से गूँज उठा।
अंत में संस्था की संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने सभी आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों एवं दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए इस सफल आयोजन के लिए सभी को साधुवाद दिया।
यह काव्यगोष्ठी न केवल साहित्यिक सृजन का मंच सिद्ध हुई, अपितु भारतीय संस्कृति, नारी गरिमा एवं सनातन मूल्यों के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रेरक संदेश भी प्रदान करती रही।













