
मेरे दादा जी की लाठी बोले,
जीवन अकेला चलता नहीं।
और दादी के पल्लू का सिक्का बोले,
बिन पैसे के कुछ मिलता नहीं।
उनकी झुर्रियों में छिपी कहानी ,
आँखों में बीता कल है।
बुजुर्ग सिर्फ लोग नहीं होते,
वे अनुभव के अमूल्य फल हैं।
बुजुर्गों के कदम धीमे सही,
पर सोच उनकी ऊंची होती है।
जीवन के हर कठिन राह पर सीख उनकी सच्ची होती है।
ना भूले हम उनका कर्ज,
ना तोड़े उनका दिल कभी ।
करें सम्मान बुजुर्गों का,
आशीष बने अमृत तभी।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़













