
आज हम जाति में बँट रहे हैं—अच्छा है,
कल भगवान भी बँट लेंगे—अच्छा है।
राम तेरे, श्याम मेरे,
शिव मेरे, विष्णु तेरे
फिर कोई आएगा,
खिलजी, औरंगज़ेब या कोई और संतान-विरोधी,
हम फिर लूटेंगे, लड़ेंगे, मरेंगे,
संतान बँट जाएगी जातियों में—अच्छा है।
कोई पद्मनी फिर जलेगी,
झाँसी फिर लड़ेगी,
जौहर फिर सजेगा,
राणा फिर लड़ेंगे,
पृथ्वी फिर छल जाएंगे— अच्छा हैं
हमारा क्या?
मैं पंडित हूँ, मैं राजपूत हूँ,
मैं हरिजन हूँ, मैं वैश्य हूँ—अच्छा है।
देश जलता है—जले मेरा क्या।
आर एस लॉस्टम










