Uncategorized
Trending

गजल।।

कहे किसको जाकर,,,,
ये दिल के अरमां
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,

फिजाओं से कह दो,,
तुम अब ये जाकर,,2
वक्त अभी ये, मुनासिब नहीं है,,
कहे किसको जाकर, ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,,

कहे किसको जाकर ,,हम अपनी आप,बीती,,2
ये नजर अब तुम्हारे बस की नहीं है,,,
कहे किसको जाकर ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है ,,,2

कहता है शागिर्द, सभी अपनों से,,
यह कलम अब तुम्हारे बस की नहीं है2
कहे किसको जाकर ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,2

,,,,,राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश


कहे किसको जाकर,
ये दिल के अरमां,
अब हम तुम्हारे,, काबिल नहीं हैं,,,2

कहे किसको जाकर,,,,
ये दिल के अरमां
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,

फिजाओं से कह दो,,
तुम अब ये जाकर,,2
वक्त अभी ये, मुनासिब नहीं है,,
कहे किसको जाकर, ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,,

कहे किसको जाकर ,,हम अपनी आप,बीती,,2
ये नजर अब तुम्हारे बस की नहीं है,,,
कहे किसको जाकर ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है ,,,2

कहता है शागिर्द, सभी अपनों से,,
यह कलम अब तुम्हारे बस की नहीं है2
कहे किसको जाकर ये दिल के अरमां,,
अब हम तुम्हारे काबिल नहीं है,,2

राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *