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शिक्षक के साथ


विधा – मौलिक कविता

एक उम्मीद टूट जाने से
दिल सच में ठिकाने बदल लेता है,
भटकता है गलियों में,
जैसे कोई छात्र बिना पाठ के
खड़ा हो जीवन की परीक्षा में।

पर तभी—
एक शिक्षक आता है,
धीरे से कंधे पर हाथ रखता है,
और कहता है—
“गिरना अंत नहीं,
यह तो अगली उड़ान की तैयारी है।”

फर्क़ नहीं पड़ता समंदर को
एक कश्ती के डूब जाने से,
पर उस कश्ती के नाविक के लिए
पूरा आकाश ही बदल जाता है।
तब शिक्षक ही होता है
जो सिखाता है—
कैसे लहरों से दोस्ती की जाए,
कैसे तूफानों को दिशा बनाई जाए।

सारी दुनिया हसीन लगती है
जब मन में विश्वास का दीप जले,
और यह दीप—
किसी बाजार से नहीं खरीदा जाता,
इसे तो शिक्षक ही
अपने अनुभव की बाती से
जला देता है चुपचाप।

एक घर सजाने से
जिंदगी नहीं सजती,
जिंदगी सजती है
जब विचारों को आकार मिलता है,
जब शब्दों में संयम आता है,
जब सपनों को पंख मिलते हैं—
और यह सब
शिक्षक के साथ चलते-चलते
अनजाने ही मिल जाता है।

उसकी रहमत से बात बनती है—
हाँ,
पर उस रहमत को पहचानना
शिक्षक ही सिखाता है।
और एक मुस्कान—
जो हौसला बन जाए,
वो मुस्कान भी
अक्सर किसी गुरु की ही होती है।

हर बहाना बरत चुका है मन,
कभी आलस, कभी डर,
कभी “मुझसे नहीं होगा” का पर्दा—
पर शिक्षक उन बहानों को
धीरे-धीरे उतार देता है,
और दिखाता है
असली चेहरा—
जहाँ साहस रहता है,
जहाँ संभावना मुस्कुराती है।

अब वो आएगा किस बहाने से—
यह प्रश्न नहीं रह जाता,
क्योंकि शिक्षक सिखा देता है
कि किसी के आने का इंतजार नहीं,
खुद रास्ता बनना होता है।

शिक्षक के साथ चलना
सिर्फ पढ़ना नहीं,
यह एक यात्रा है—
अंधकार से उजाले तक,
संशय से विश्वास तक,
और एक साधारण से इंसान का
असाधारण बनने तक।।

रचनाकार

“कौशल”
मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

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