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ज्ञान से कर्म तक की यात्रा

मनुस्मृति के पृष्ठों से निकली एक पहचान,
धर्म, ज्ञान, संयम से सजी उसकी शान।
वेदों का ज्ञाता, तप का अधिकारी,
समाज का दीपक, सत्य का पुजारी।

पर आज का युग बदल चुका स्वरूप,
जन्म नहीं, कर्म से बनता है अनूप।
जिसमें हो विद्या, विनय और विचार,
वही है ब्राह्मण, वही सच्चा आधार।

नहीं केवल जनेऊ, न कुल की रेखा
आचरण में झलके उसका लेखा।
जो बांटे ज्ञान, हटाए अज्ञान का तम,
वही ब्राह्मण है, वही है श्रेष्ठतम।

सेवा, करुणा, और सत्य का संग,
जीवन में भर दे नैतिकता का रंग।
न हो अहंकार, न भेदभाव की दीवार,
सबमें देखे ईश्वर का विस्तार।

मनुस्मृति का संदेश अब यही कहे,
मानवता में ही ब्राह्मणत्व रहे।
जो खुद जले और जग को रोशन करे।
वही सच्चा ब्राह्मण कहलाए धरे।

ज्ञान की गंगा निरंतर बहाए जो।
हर दिल में सद्भाव जगाए जो।
लोभ-मोह से सदा रहे परे,
धर्म की राह पर दृढ़ता से डटे।

वाणी में मधुरता, कर्म में प्रकाश,
सबके लिए रखे समान विश्वास।
युग के संग बदले जिसकी पहचान,
वही आधुनिक सच्चा ब्राह्मण महान।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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