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मैं आत्मा

मैं,आत्मा,,
आत्मा ही परमात्मा, ।।
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मैं हूं ब्रह्म तत्व अविनाशी
मैं हूं ब्रह्म तत्व से जन्मा ।

मुझे जाना है, उसी में मिलना,
मैं हूं शाश्वत, सत्य ,सनातन ।
मैं हूं, जन्म मरण से छूटा,,
ना मै जन्मा ,ना कभी मैं मरता ।।
मैं हूं अजर अमर अविनाशी,,
मैं हूं ,सद,चिद ,आनंद रूप सनातन।
सब ही है मुझ में, और मैं ही हूं सब में,,
क्या कहूं मैं खुद को ,
मैं ही हूं एक, और मैं ही रूप अनेक ।।

राजेंद्र कुमार तिवारी, मंदसौर, मध्य प्रदेश

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