
मन के आंगन में बचपन की मधुर यादें,
म़न को आज भी हंसाती वह मधुर यादें,
वह अम्मा का प्यार और नानी का दुलार
नहीं एक पल को भूलती वह मधुर यादें ।।
सभी हंसते खेलते खाते संग में
घूमने जाते पढ़ने भी जाते संगमे
कभी क्रिकेट की बातों में लड़ जाना
लौट कर बैठ जाती फिरसंग में
कहां भूल पाता कोई वह मधुर यादें।।
खेतों की पगडंडी पर दौड़ लगाना,
तितली के पीछे दूर निकल जाना।
इतराना तोड़ना कच्चे फलों को
लौट कर आनामिल बाटकर खाना
कैसे भूल सके कोई वे मधुर यादें।।
साँझ ढले जब घर वापस आना,
अम्मा की आँखों में चिंता पाना।
प्यार लुटाना, फिर बाहों में भरकर
डाँट में भी अपनापन झलकाना,
मन को आज रुलाती वे मधुर यादें।।
पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश












