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विद्याधन श्रेष्ठ धन है

वैसे तो मौन सकारात्मक गुण है,
पर जब समझदार लोग मौन और
नासमझ लोग ख़ूब बोलने लगते हैं
तो घर व समाज बर्बाद होने लगते हैं।

गन्दा जल शान्त छोड़ दिया जाता है,
तो गन्दगी स्वतः ही नीचे बैठ जाती है,
जीवन में परेशानी आने पर बेचैनी से
नहीं, शांति से हल जरूर निकलता है।

जीवन में चार चीजों पर भरोसा बिना
सोच विचार किए ही करना चाहिये,
ईश्वर, सत्य, पुरुषार्थ और स्वार्थ
हीन मित्र पर भरोसा होना चाहिये।

समय, विश्वास और सम्मान, उन
परिंदों की तरह होते हैं जो उड़ जाएँ
तो वो वापस कभी नहीं आ पाते हैं,
इसलिये इन्हें ध्यान देकर संभालते हैं।

विद्याधन ऐसा धन है जो न किसी
के द्वारा चोरी किया जा सकता है,
न किसी के द्वारा छीना जा सकता है,
न भाई भाई में बाँटा जा सकता है।

इसका कोई परिमाण नहीं होता है,
इसे जितना ज़्यादा दिया जाता है,
यह उतना ही ज़्यादा बढ़ता रहता है,
विद्याधन सभी तरह से श्रेष्ठ धन है।

गीता ज्ञान यह कहता है दूसरों की
निंदा करना एक नकारात्मक गुण है,
और हर स्थिति में शान्त बने रहना
जीवन का एक सकारात्मक गुण है।

आदित्य स्वयं को सम्भालना है तो
सारे संसार को सुधारना ज़रूरी नहीं,
आदित्य जूते पहन काँटों से बचना है,
जमीं पे क़ालीन बिछाना ज़रूरी नहीं।

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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