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मंज़िल और गन्तव्य

जीवन में प्रतिपल धैर्य रखकर अपना
कर्तव्य पालन निरंतर करना होगा,
क्योंकि उचित समय आने पर ही
किसी भी कर्म का फल प्राप्त होगा।

माली प्रतिदिन पौधों को पानी देता है
मगर फल सिर्फ मौसम में ही आते हैं,
इसीलिए जीवन में धैर्य रखें और पूर्ण
विश्वास के साथ बेहतर काम करें।

हमको उसका फल समय आने पर
अवश्य ही मिलेगा, प्रयत्न यही हो,
हमारा हर पल अपनी तरफ से हर
किसी के साथ प्रेमपूर्वक व्यतीत हो।

सत्य है कि हमारा जीवन आज है
पर कल शायद रहेगा या नहीं रहेगा,
पर हमारा किया गया अच्छा काम
दुनिया भर में सदा याद रखा जाएगा।

हम जीवन में प्रसन्न रहना चाहते हैं
तो यश व श्रेय लेने की इच्छा न रखें,
संतुष्ट रहना चाहते हैं तो सत्य मार्ग
पर चलते रहने का ध्येय सदा रखें।

यदि मंज़िल सुहानी है तो हमें गंतव्य
की स्थिति अवश्य जान लेना चाहिये,
आदित्य अगर गंतव्य भी पसंदीदा है,
तो मंज़िल निर्भीक तय करना चाहिये।

डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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