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जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।वो रातरानी की खुशबू और, तुम्हारी खिड़की याद आती है।।

तेरा नशीली आँखों से चुपके-चुपके देखना,
खुले बालों को अदा से यूँ ही झटकाना।
और हल्की सी मुस्कान में दिल मेरा ले लेना।
चांदनी रात में वो तेरा, चमकता चेहरा याद आती है।।

जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।
वो रातरानी की खुशबू और, तुम्हारी खिड़की याद आती है।।

वो शामें, वो हवाएँ, वो मौसम सुहाना,
तेरा खिड़की पे आकर धीरे से मुस्कुराना।
तेरा यूँ नज़रें मिलाकर फिर से नज़रें चुराना,
खामोश इश्क़ में भींगी यादों का, वो दास्तां याद आती है।।

जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।
वो रातरानी की खुशबू और, तुम्हारी खिड़की याद आती है।।

जब भी दिल उदास होती है, रूह बेचैन हो जाता है,
तेरी हर एक अदा फिर से, आँखों में उतर आता है।
लगता है जैसे अब भी, तू वहीं खड़ी होगी,
राहों में चुपचाप, मेरी आहट के इंतजार में, याद आती है।।

जब भी ग़म सताता है, बस तेरी याद आती है।
वो रातरानी की खुशबू और, तुम्हारी खिड़की याद आती है।।

रवि भूषण वर्मा

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