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कुछ लम्हें जज्बातों के

बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए,
क्या खता हुई यूं ही रूठ गए,
न कोई खत न पैगाम आया,
लम्हों की जज्बातों में यूं ढल गए,
बातों ही बातों मैं बहुत कुछ कह गए।

कुछ लम्हों का ही सफर था,
कुछ पल खुशी का माहौल था, क्या पता सफर का अंतिम दौर भी आएगा,
खामोशियों के मंजर में यूं खो गए,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए ।

बातें करते करते यूं शाम ढल गए,
बस फिर सुबह का इंतजार रहता,
दिल के कुछ गहराइयों में उतर गए,
मेरी आदत सी बन गए,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए

देखती राह ताकते नजर नहीं झुकता,
सांसे थमी -थमी सी मन विचलित होता,
आंखों में बस गए थे वो छवि
नैनो को टिकाए रह गए,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए।

कुछ उम्मीदें बस बातें करने की थी,
चाहतें बस एहसास दिलाने की थी,
बस यू नजर अंदाज कर गए,
चाहत में आपके डूब गए,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए

बातें करते करते यूं फिसल गए,
आपका हुस्न ताकते हि रह गए
न कोई शिकायत थीं,
न कोई सवाल था,
भावनाओं में यूं बह गए,
बातों ही बातों में बहुत कुछ कह गए।

नलिनी शैलेन्द्र दास

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