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सामाजिक समरसता।।

एक सोच नेक राह,,,
चलो इतना तो हम कर पाएं,
मैं और तुम अब हम हो जाएं।2
दोनों मिलकर ये कदम उठाए,,
मैं और तुम अब हम हो जाएं,,,
चलो इतना तो हम कर पाएं,,,,,2

सच्चा दिल हो और सच हो इरादे
सच करने का हम बीड़ा उठाएं,,2
कभी ना किसी का हम दिल दुखाए2
मैं और तुम अब हम हो जाएं,,,,2

चाहे कोई भी बात हो मन में,,,
हिल मिलकर उसको सुलझाएं2
सबको साथ लेकर जीवन में,
अब सुख दुख को हम साथ बिताए,,2

मैं और तुम अब हम हो जाएं,,
चलो इतना तो हम कर पाएं2

राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर, मध्य प्रदेश

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