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इक दफा हमको पराया तो करो

हर अज़ा पे हक जताया तो करो,
इक दफ़ा हमको पराया तो करो।।

नज़रें झुका कर कुछ फ़रमाइए,
साथ में एक गुलाब लाया तो करो।।

मुहब्बत है तो कभी हाल-ए-दिल,
इश्क़ की तख़्ती सुनाया तो करो।।

किताबों में छुपा कर रखे थे जो ख़त,
सुनो वो ख़त कभी पढ़ाया तो करो।।

चाँद तारों की रोशनी में मुहब्बत के,
हसीं लम्हों के नग्मे गुनगुनाया तो करो।

रजनी कुमारी
लखनऊ उत्तर प्रदेश

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