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प्रेम

प्रेम और कुछ भी नहीं,
बस एक एहसास है…
जो दूर होकर भी दिल के सबसे पास है।

जैसे ये दो पंछी
बिना शब्दों के सब कह जाते हैं,
वैसे ही कुछ रिश्ते
खामोशी में भी मुस्कुराते हैं।

ना रोज़ मिलने की ज़िद,
ना हर पल साथ निभाने की चाह,
बस एक सच्चा अपनापन हो,
तो आसान लगने लगती है हर राह।

कभी आँखों में उतर जाता है प्रेम,
कभी दुआ बनकर दिल में बसता है,
और जब कोई सच्चे मन से अपना हो,
तो हर दर्द भी कम लगता है।

मेरे मन में भी एक ऐसा रिश्ता है,
जो शब्दों से नहीं,
सिर्फ एहसासों से जुड़ा है…
जहाँ दूरियाँ मायने नहीं रखतीं,
क्योंकि प्रेम तो हर हाल में
दिल के सबसे करीब खड़ा है…॥

नेहा कुमारी (खुशी)

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