
एक प्याली चाय में जाने,
कितनी यादें घुल जाती हैं,
कुछ मीठी बातें मां की,
कुछ थकानें धुल जाती हैं।
सुबह की पहली किरण संग,
जब चाय की खुशबू आती है,
सूनी सी इस भागती दुनिया में,
अपनेपन की लौ जल जाती है।
कभी सहेली बन मुस्काए,
कभी मां सा दुलार देती,
ये छोटी सी चाय की प्याली,
जीवन को त्योहार देती।
बरसों के रिश्ते महक उठें,
जब साथ किसी का मिल जाता,
एक कप चाय के बहाने ही,
दिल से दिल फिर जुड़ जाता।
चाय केवल पेय नहीं है,
भावों की मधुर कहानी है,
हर घूंट में छुपी हुई,
अपनों की प्यारी निशानी है।
अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस पर,
बस इतनी सी अरदास रहे,
हर आंगन में प्रेम महके,
हर चेहरे पर मिठास रहे।
प्रो० सुषमा देवी गुप्ता












