
विषय : चित्राधारित
विधा : पद्य
चाय दिवस तो नित्य हो मनाते ,
कोई आय दिवस भी बना लो ।
नौकरी कृषि जो भी तुम करते ,
व्यवसाय दिवस भी मना लो ।।
चाय से कोई पेट नहीं भरता ,
अधिक चाय होती है बीमारी ।
चुनना हमें है चाय या भोजन ,
रोगग्रस्त या स्वास्थ्य है प्यारी ।।
चाय देता है कोई शक्ति नहीं ,
चाय तन को स्फूर्ति ही है देत ।
भोजन देता हमें शक्ति बहुत ,
भोजन बिन चाय शक्ति लेत ।।
चाय तो विलासिता की वस्तु ,
चाय कॉफी पैसों का है खेल ।
उन गरीब असहायों से पूछो ,
जो तुमसे नहीं खा पाते मेल ।।
चाय बिन चलना नहीं रूकते ,
भोजन बिन चाल रूक जाए ।
अनिवार्य आजीविका साधन ,
अन्न बिन स्वास्थ्य चूक जाए ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।












