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तेरी बांसुरी के धून

जमुना तट पर बांसुरी बजाकर क्यों मुझकों बुलाता है।
सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।।
राधे राधे बोलकर कान्हा क्यों तु इनता शोर मचाता है।
सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।।

राधा तेरी रानी है और तुंहीं मेरा प्रित रे।
तेरा मेरा सदियों तक गया जाएगा गीत रे।।
हर युग के बाद जब युग आता है हर युग में राधे कृष्ण साथ हरता है
सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।।

जन्मों जन्म का कान्हा तेरा मेरा नाता है।
बृह्मा विष्णु महेश स्वयं तु भी तो कहता है।।
भले शादी रूकमण से पर मुझसे प्रित तु निभाता है।
सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।।

राधे राधे हर कोई जाने राधे राधे रटतें हैं।
तेरी कृपा है कान्हा राधे राधे गुण गातें हैं।।
किसी एक का नाम लेने से आशिष हम दोनों का मिलता है।
सुन कन्हैया रे तेरी बांसुरी के धून से बड़ा सुकून मिलता है।

चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,

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