
जब सुबह सवेरे हम उठते,
पहेले चाय की चुश्की लेते।
फिर दिनभर का प्लान बनाते,
काम के लिए हम तैयार होते।।
जब घर पर मेहमान आते,
चाय से हम स्वागत करते।
जी भरकर हम बातें करते,
फिर एक चाय और पी लेते।।
थकेहारे जब हम घर आते,
हम थकान चाय से दूर करते।
पढ लिखकर घर बच्चे आते,
मम्मा चाय-चाय वो चिल्लाते।।
जब किसी से हम चर्चा करते,
हम चाय पर घर उन्हें बुलाते।
खुबसारी उनसे यूंं चर्चा करते,
इंंस्टा पर अपनी रील बनाते।।
जब दफ्तर मेंं हम थक जाते,
कड़क चाय का आॅडर देते।
हम मिटिंग जब ओर चलाते,
एक चाय फिर ओर बनवाते।।
जब रिश्तों मे कड़वाहट आती,
वो अपने घर पर हमें बुलाती।
इर्ष्या,द्वेष को यूं दूर भी करती,
कड़क चाय फिर हमें पिलाती।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












