
बुरे हालत हैं साहब जिधर देखो बेदर्दी है,
हुकूमत ज़ालिम की है उसी के साथ वर्दी है।
लगी है आग नफरत की हमारे मुल्क भारत में,
लगाकर राम का नारा करते गुंडागर्दी है।
सच बोलो तो गद्दार कहे जाते हो यहाँ,
सवाल करो तो जेल की सलाखें नसीब होती हैं।
मज़लूम की चीख़ दबा देते हैं थानों में,
और कैमरे पे सबको देशभक्ति सीख होती हैं।
अदालत भी खामोश है, मंच भी बिक गए हैं,
मीडिया बजाता है वही राग जो हुक्म होता है।
गरीब भूखा मरता है, किसान सड़क पे सोता है,
और नेता मंदिर-मस्जिद का हिसाब जोड़ता है।
इंसानियत दम तोड़ रही है गली-कूचे में,
मगर नारे लगते हैं “देश आगे बढ़ रहा है”।
जिसके हाथ में लाठी है, उसी का सच माना जाता है,
जो बेबस है, उसी को झूठा कहा जा रहा है।
अब बस इतना कहूँगा, सुन लो ऐ हाकिमों,
नफरत की फसल उगाओगे तो आग ही काटोगे।
भारत का दिल तोड़ा तो टूट जाओगे खुद भी,
क्योंकि ये मिट्टी माफ नहीं करती, याद रखोगे।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला ‘अमन’ सनातनी
सावनेर नागपुर ( महाराष्ट्र)












