
भाई मेरा साया, मेरी ढाल है
प्रेम डोर से बँधा, रिश्ता भाई का,
सबसे अनमोल और सबसे सच्चा,
लड़ाई, झगड़ा भी भाई-भाई का,
अधूरा भाई बिन हर पल, हर घर।
बचपन में साइकिल में ले जाना
परंतु गिरने क़भी न देना और
गिर जाये तो प्यार से उठाना,
माँ पिता की डाँट से बचाना।
जब जब दुनिया ने रंग दिखाया,
तेरी हिम्मत ने मुझे गिरने न दिया,
तू साथ है तो डर किस बात का,
तू साथ तो जीत हर जज़्बात का।
न धन चाहिए, न शोहरत चाहिए,
तेरा साथ हर जन्म, ये दुआ मिले।
तू रूठे मैं मनाऊँ, रोऊँ तू हँसाए,
ऐसा रहे बंधन- भाई ये बतलाए।
राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न से भाई
श्री कृष्ण और बलराम जैसे भाई,
रहना यूँ साथ बनके मेरी परछाई,
तेरे बिन सूनी जीवन की शहनाई।
ज्ञान प्रकाश, राजेंद्र मेरे अनुज,
स्व. बाबू शंकर जी मेरे अग्रज,
माता पिता की निशानी हैं भाई,
आदित्य भाई दिवस की बधाई।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












