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समाज के सदा आभारी रहें

ज़िंदगी की ख्वाहिशें ज़िंदगी
भर मनुष्य को भगाती रहती हैं,
कुछ ख्वाहिशें ख़ुद की होती हैं,
तो और कुछ जमाने की होती हैं।

जब हम सफल हो जाते हैं,
दुनिया परिचित हो जाती है,
दुनिया का परिचय मिलता है,
जैसे ही असफलता मिलती है।

याद रखें एक दिन आता है,
जब हर चीज ढल जाती है,
व्यवहार व प्रेम की महिमा
जो कभी नहीं ढल सकती है।

प्रतिभा ईश्वर से मिलती है,
उसके सामने नतमस्तक रहें,
प्रसिद्धि समाज से मिलती है,
समाज के सदा आभारी रहें।

मन की प्रवृत्ति और अहंकार
अपने आप से ही मिलते हैं,
इसलिए इनसे सावधान रहें,
इन दुर्गुणों से सदा दूर रहें।

आदित्य समाज सुधार का संघर्ष
करने वालों का साथ देना चाहिए,
क्योंकि वह हमारे हित की लडाई
लड़ते हैं हमें समझ आना चाहिये।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

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