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शादी और उसका प्रभाव

हमारा समाज आज शादी की मांग में एक बाप के कर्ज से अपनी बेटी को सौंपता है, जहां समाज वालों का कहना है की शादी धूमधाम से नहीं की तो तुम छोटे हो जाओगे,या तुम गरीब हो, यदि ये सब समाज तय कर रहा है तो क्यों एक बाप कर्ज लेकर शादी करता है, क्यों हम दिखावा करते हैं,नयी-नयी परांपरा हम बना रहें हैं ,जिनका कोई महत्व नहीं है, और शादी में 2-4 दिन की तारीफ के लिए 5-7 लाख खर्च कर देते हैं, यदि आपके पास पैसे हैं तो खर्च करें पर दूसरों लोगों की होड़ में कर्ज की बलि न चढ़े, शादी तो हो जाएगी पर वो कर्ज की नींद आपको चैन से नहीं सोने देगी”

और लड़कियों से निवेदन है की आप यदि समझदार है तो जरा सोचिए की आपके पिता इतने पैसों का कर्ज लेकर क्या सो पाएंगे,आप किसी लड़की को देखकर न सोचें की उसकी शादी धूमधाम से हुई हम भी करेंगे, निवेदन है ऐसा सोचना बंद करें,यदि आप समझदार है तो अपने पिता की पगड़ी का ध्यान रखें वो कर्ज और किसे के हाथ जोड़ने पर निर्भर न रहें।
रही बात की लड़के वाले नहीं मानेंगे वो धूमधाम से करना चाहते हैं तो मैं आपको एक बात बता दूं,जो रिश्ता प्रेम से बंधा है वो आपकी बातों में सहमत होगा ,ये दिखावा,धूमधाम,की जगह साधारण शादी के लिए हां करेगा।
“होड़ करना बंद करों,
कर्ज लेकर शादी न करों,
रिश्तों में विश्वास बंधकर,
बेटी को विदा करों”

नीतू नागर (धाकड़):) सोशल वर्कर/नारी शक्ति संगठन संस्थापिका

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