
रचनाकार-सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर
जीवन में जिसकी सांसे हो गई खत्म,
आदमी मुर्दा बन चिता में जल रहा है।
पास मुर्दे के खड़े सब लोग हंस रहे हैं,
देखो कैसा चलन जग में चल रहा है।
मुर्दे के साथ श्मशान जाते सब लोग,
जलाकर मुर्दे को हाथों को धो रहा है।
तूं धर्म के नाम पर मत मार बन्दों को,
कोई भी नां धरा पर सदा यहां रहा है।
जलना होगा एक दिन यहां सबकों,
याद रख लें प्राणी वो दिन आ रहा है।
पगड़ी पर तेरी बनेंगे तेरे लिए व्यंजन,
प्रथा कैसी सब जन उसको खा रहा है।
सुनील कुमार खुराना चल सत् की राह,
तेरे समय का चक्र हर पल गुजर रहा है।
सच्चाई की डगर ही देगी तुझको मोक्ष,
तूं हर पल जीव क्यों नहीं समझ रहा है।
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश












