
मानव जीवन अतिमूल्य होते हैं
छोटों से लेकर बड़ों तक रहते हैं
वे रीति रिवाज से जिंदा बिताते हैं
इससे अपने कुटुंब आदर्श बनेंगे।
बड़ों की बात पर ध्यान देना है
नैतिक मूल्यों पर महत्व जानना है
संप्रदाय से कार्यरत करना है
इससे संस्कृति के वैभव बढ़ेंगे।
रीति के अनुसार पर्व मनाता है
इसे अपने संस्कार पता चलता है
भावी पीढ़ियों को बोध होता है
इससे जीवन सही पथ पर चलेंगे।
संस्कृति से संस्कार मिलती है
इससे मानुष की कीर्ति बढ़ती है
संघ में गौरव प्रतिष्ठा बढ़ती है
इसे संस्कृति को मत भूलेंगे।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश












