
एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का लड़का रहता था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। पिता खेतों में मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में काम करती थीं। कई बार घर में दो समय का भोजन भी मुश्किल से मिल पाता था।
लेकिन अर्जुन के मन में एक सपना था — वह पढ़-लिखकर बड़ा अधिकारी बनना चाहता था। गाँव के लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे। कोई कहता,
“गरीब का बेटा क्या बड़ा बनेगा?”
तो कोई कहता,
“सपने देखने से कुछ नहीं होता।”
इन बातों से अर्जुन का दिल दुखता जरूर था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
दिन में वह खेतों में काम करता और रात को सड़क के किनारे लगी लाइट में पढ़ाई करता। कई बार ठंड में हाथ काँपते, कई बार आँखों से आँसू निकल आते, पर उसके इरादे नहीं डगमगाए।
एक दिन परीक्षा का परिणाम आया। अर्जुन पूरे जिले में प्रथम आया। वही लोग, जो कभी उसका मज़ाक उड़ाते थे, आज उसकी प्रशंसा कर रहे थे।
तब अर्जुन ने मुस्कुराकर कहा —
“संघर्ष इंसान को कमजोर नहीं बनाता, बल्कि उसकी ताकत पहचान कराता है।”
उसकी कहानी पूरे गाँव के लिए प्रेरणा बन गई।
सीख
कठिन परिस्थितियाँ सफलता का रास्ता रोक नहीं सकतीं।
मेहनत और धैर्य हर संघर्ष को जीत में बदल सकते हैं।
रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)












