
पेड़ पौधे, नदिया और तालाब l
सुंदर सबकी आभा, दिखते नायाब ll
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फल फूल, मेवा और मसाले हैं खूब l
खाने को बनाते पौष्टिक और स्वाद से भरपूर ll
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आकाश, बादल और रिमझिम बरसात l
बिन मांगे मोती बरसे, फसलें हों बेहिसाब ll
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इंद्र धनुष सा सबका जीवन, मोतियों से भरपूर l
चलो साथ हो लें डगर में,
छाया हैं थोड़ा कोहरा सुदूर ll
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पानी सा निश्चल, साथी हो ऐसाl
मिले जिसमें हो जाय वैसे का वैसा ll
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डगर डगर जब भी मिले न कोई छोर l
आओ बैठे संग मिलेगी राह,
आते ही भोर ll
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रंग ही रंग दिखे चारों दिशाओं में
सुहाना हो गया मौसम l
तुम्हें भी मुबारक हो, छा गया गीतों में मनुहार का मौसम ll
सरोज बाला सोनी
कवयित्री












