
सच ,समय की रफ्तार में
जिंदगी की भागम भाग में
आज बदल गई है रफ्तार जिंदगी की
अपने ख्वाबों, अरमानों को पूरा करने की चाह में सभी दौड़ लगा रहे हैं
कर्तव्यों को निभाने में, मैं ये करूं या वह करूं, यह सही है या गलत है.?
इसी संशय में जिंदगी की रफ्तार के साथ बढ़ते जा रहे हैं
जिंदगी बहुत तेज रफ्तार है तेरी
आज समय की रफ्तार में जिंदगी बिल्कुल बदल गई है
थोड़ा धीरे-धीरे भाग ऐ जिंदगी
ताकि मैं कुछ समझ सकूं कि
मुझे क्या करना है..?
ये राहें मुझे मंजिल तक पहुंचाएगी
कि नहीं
मन के आलस्य में कितने ही काम
छूटते गए और हम समय के साथ
नहीं चल सके
रिश्ते अब वो रिश्ते ना रहे
किसी को किसी के साथ निभाने की फुर्सत नहीं
सभी अपने आप में लगे हुए हैं
किसी को किसी की कोई फिक्र नहीं
जिंदगी की तेज रफ्तार में अब चलना बड़ा मुश्किल हो गया है
आज जरूरत है जिंदगी को समय के साथ सामंजस्य बैठाकर चलने का
तभी हमारी जिंदगी का पहिया
सही ढंग से चल पाएगा
डॉ मीना कुमारी परिहार












