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पिताजी

वह गृह के अधिपति होते है
कुटुंब को पोषण करते हैं
उलझनों को दूर करते हैं
धैर्य सहन के प्रतीक बनते हैं
पिता परिवार की रीढ़ होते।

वह नित कार्यरत करते हैं
सब से मिलजुलकर रहते हैं
वंश गौरव प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं
अपने लक्ष्य को स्वयं निभाते हैं
पिता परिवार के नायक बने।

वह सच्चाई  से जीवन बिताता
घर में अनुशासन को बढ़ाता
छोटी छोटी कसूर को सुधारता
सब को आत्मविश्वास बढ़ाता
पिता परिवार के सेवक बने।

वह निरंतर श्रमिक बन जाता है
सुख दुख को मुकाबला करता है
सुखों को त्याग कर सकता है
अपने कुटुंब केलिए श्रम करता है
पिता घर के प्रत्यक्ष देव होते।

श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश

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