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मेरे लड्डू गोपाल


( जन्माष्टमी की सभी को बधाई ! )

पिया मेरे वो हैं मेरे लड्डू गोपाल
हूं मैं प्रेम-बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

हिय विराजे वो बन हिय के राजे
अंग-अंग वो समाये हिय में साजे
पिया मेरे वो हैं मेरे लड्डू- गोपाल
हूं मैं प्रेम-बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

रात-अंधेरी मेरे सपन वो आजे
मुरलीधर की मुरलीधुन तब बाजे
पिया मेरे वो हैं मेरे लड्डू-गोपाल
हूं मैं प्रेम -बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

बन चंदा वो मेरीअटरिया विराजे
चांदनी बन वो निंदिया उड़ा जे
पिया मेरे वो हैं मेरे लड्डू-गोपाल
हूं मैं प्रेम-बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

भौर-तारा बन वो खिड़की आजे
बन शीतल-बयार वो हिय लागे
पिया मेरे ! वो मेरे लड्डू- गोपाल
हूं मैं प्रेम-बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

सूर्य-किरण बन वो गले से लागे
प्रेम-हिलोर बन मेरे हिय समा जे
पिया मेरे वो हैं मेरे लड्डू- गोपाल
हूं मैं प्रेम-बावरी कहूं उन्हें लड्डू-गोपाल वो मदन-गोपाल।

      महेश शर्मा, करनाल

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