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गज़ल

तेरे हसीन चेहरे पर,
मुझे अब एतबार नहीं रहा ,

तेरे मासुम दिल में,
मेरे लिए अब वो प्यार ही नहीं रहा,

कर भी लेते सोदा बाज़ी,हम इस इश्क में
दिल देकर – दर्द लेने में ऐ दिल

मगर हार में जीत का
अब वो एहसास नहीं रहा ।

तेरी रेशमी बालों की घनघोर घटाएं अंधेरा मिटा नहीं सकती,
अब सबेरे वाला उजाले का वो प्यार नहीं आता,

रातें बिताई जो कभी हमने,
उन लम्हों को याद करके तड़पता है दिल,

तेरा इतना बदल जाना, मुझे विश्वास नहीं होता,

वक्त कट जाएगा हमारा जीवन का खुशी-खुशी , अपने हाथों की लकिरों से लिखा गया भाग्य का नहीं मिटता ,

तुम ही लिखतीं आई हो मेरी तक़दीर के फैसले,
खुदा के लिखे फैसलों में अब एतबार नहीं रहा।।

अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)

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