Uncategorized
Trending

जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे

आंखों में रील बोओगे तो
ध्यान कहाॅं से लाओगे ?
मन में महाभारत बोओगे तो
मन में महावीर कहाॅं से लाओगे ?
दृष्टि जैसी सृष्टी वैसी,
जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे।

नागफनी बोओगे तो गुलाब कहाॅं से पाओगे।
अहंकार बोओगे तो आर्शीवाद कहाॅं से पाओगे।
कर्म का ही सारा हिसाब है।
जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे।

बारूद बोओगे तो शांति कहाॅं से लाओगे।
नफरत बोओगे तो बस्ती कहाॅं से बसाओगे।
छीन सकते हो सांसे, दे नहीं पाओगे।
जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे।

संस्कार बोओगे तो आशीष पाओगे।
सेवा बोओगे तो तीर्थ बन जाओगे।
कुत्ता कार में मां बाप वृध्दाश्रम में।
सोचो,मोक्ष कहाॅं से पाओगे?
जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे।

गुलजारी लाल जैन( जी एल जैन)
जबलपुर म.प्र.
मौलिक स्वरचित

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *