
एक वेणी जपाकर्णपुरा
नग्ना खरस्थिता।
लंबोश्ठी कर्णिकाकर्णी
तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोह
लताकंटक भूषणा।
वर्धन्मूर्धधवजा क्रष्णा
कालरात्रि भयंकरी।
माँ कालरात्रि माँ दुर्गा का सातवाँ
रूप है जिनका रंग घना काला है,
बिखरे हुए बाल, गले में चमकने
वाली माला है, उनके तीन नेत्र हैं।
इनकी नाक से भयंकर ज्वालायें
निकलती हैं, इनका वाहन गधा है,
माँ काल रात्रि का नाम भी इनके
रूप व रंग की वजह से ही पड़ा है।
आदित्य माँ काली खप्पर वाली,
एक वेणी, माँ कालरात्रि भयंकरी,
ॐ सप्तम माँ दुर्गा माता कृष्णा,
कालरात्रि नव दुर्गा देव्यै नम:।
डा० कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ









