
रामेश्वरम के मस्जिद वाली गली में ,
चुने पत्थर का घर था प्यारा।
सादा जीवन, ऊँचे विचार,
यही था उनका सहारा।
पिता थे आडंबरहीन व्यक्तित्व के धनी ,
माता थी सर्वगुण संपन्न गुणी ।
पिता अध्यात्म की जटिलताओं को ,
सरलता से समझाते।
समस्याओं से लड़ना और आत्म विश्लेषण
करना सिखलाते।।
अपने सपनों को कठिनाइयों में भी, ऊँचा रखा,
मंज़िल का रुख हरदम जीवन में, सच्चा रखा।
रॉकेटों से आकाश छू लिया, विज्ञान को नया रूप दिया।
“मिसाइल मैन” बनकर भारत का नाम ऊँचा किया।
ज्ञान और विनम्रता थे उनके जीवन के गहने।
बच्चों के प्रिय, राष्ट्रसेवा उनके क्या कहने ।
कहते थे — “सपने वो नहीं जो नींद में आएं,
सपने वो हैं जो हमें सोने न दें, कुछ कर जाएं।”
उनका जीवन एक प्रेरणा स्रोत है महान,
भारत के “रत्न” कलाम — सदा रहेंगे अमर और सम्मान।
स्वरचित काव्य
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखंड सरायपाली
जिला महासमुंद













