
होती कर्म की भी तलवार,
जिसकी होती जग में धार।
शुभ कर्म जीवन का सार,
कर्म ही करते जग में हार।।
बन्दे शुद्ध कर्म करता चल,
होगा तेरी मुश्किल का हल।
कर्म से ही होती है नैया पार,
कर्म सार है जीत और हार।।
कर्म ही आत्मा की आवाज,
मंजिल का यें करते आगाज।
कर्म करते हैं जग में शर्मसार,
कर्म होते जीवन की पतवार।।
सुबह और शाम कर्म तोल,
कर्म ही जीवन में अनमोल।
कर्म है दीपक और अंधकार,
कर्म ही है जीवन के अलंकार।।
सुनील कुमार "खुराना"
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत













