
दिव्य अनोखी दिवाली हम,
आओ आज मनाते हैं,
माटी के दीपों संग अपना,
आत्म दीप जलाते हैं।
जब तक खुद को ना जाना,
समझो अज्ञान अँधेरा है,
ज्ञान दीप जल जाने से,
फिर आता नया सवेरा है।
श्री राम आगमन पर चलो,
आज घर द्वार सजाते हैं,
सत्य-प्रेम का दीप जलाकर,
हर घर रोशन कर जाते हैं
दूर करें सब द्वेष बैर को,
एक दुजे से मिल जाते हैं
माटी के दीपों संग अपना,
आत्म दीप जलाते हैं।
जागृत आत्माओं की,
हर पल हर दिन दिवाली है,
खुशियों से भरी दुनिया,
आज हमने ही सँभाली है।
खीर, बताशे भरकर थाली,
लक्ष्मी जी को भोग लगाते हैं,
धन कुबेर की करें आरती,
घर आंगन महकाते हैं।
शुभ संकल्पों से दुनिया का,
कोना-कोना सजाते हैं,
माटी के दीपों संग अपना,
आत्म दीप जलाते हैं।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास.हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
सिवनी (मध्य प्रदेश)













