
हवा में घुल गया है प्यार और गुलाल होली में,
सखियों ने करी धमाल, हुई बेहाल होली में।
गुजिया और अनरसा औ गुलाब जामुन है बोली क्या?
हम ही क्यों हुए बेकार को हलाल होली में!!≠
सुलेखा चटर्जी भोपाल

हवा में घुल गया है प्यार और गुलाल होली में,
सखियों ने करी धमाल, हुई बेहाल होली में।
गुजिया और अनरसा औ गुलाब जामुन है बोली क्या?
हम ही क्यों हुए बेकार को हलाल होली में!!≠
सुलेखा चटर्जी भोपाल
रक्षा बंधन
लक्ष्य प्राप्ति की राह
आँचल के उस पार
रास्ते का पत्थर
यथार्थ
प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक
कल्पकथा सम्मान समारोह जुलाई २०२६ में देश भर के विद्वान साहित्यकार सम्मानित
वाह गोपाल जी, बहुत बधाई हो!
कपिलश साहित्यकार समिति खुर्जा शाखा की काव्य गोष्ठी संपन्न
आँगन की चिड़ियाबेटी की बिदाई