
होली-होली करते-करते होली का शुभ दिन आया है।
हम सबने मिलकर पावन पर्व बड़े गर्व से सजाया है।।
रंग-बिरंगी होली ने रंगों के अर्थों को समझाया है।
लाल-हरे, नीले-पीले आदि रंगों ने फ़र्ज़ निभाया है।।
सपनों की पिचकारी घोलकर हकीकत में रंग बरसाया है।
फागुन माह में रंग जमाने आखिर होली का पर्व आया है।।
पीली सरसों की मुस्कान ने खेतों को खुशहाल बनाया है।
नील गगन के नीचे धरती वासियों ने खूब जशन मनाया है।।
हे प्यारे और न्यारे जन! पूरे कर लीजिए सभी अरमान।
होली त्योहार की हार्दिक बधाई संग भेज रही हूँ पकवा न।।
प्रेम, करुणा, मैत्री के छींटे हम पहुँचाएँ चारों ओर।
आज-अभी से सुनाई दे रहा है हर घर होली का शोर।।
जीवन को रंगने का अवसर हर पल हमें समझाता है।
कल की चिंता करने वालों को आज संभलना सिखाता है।।
जीवन में उत्साह व नई ताज़गी भरना सब हमें समझाते हैं।
रंग-बिरंगी होली में मित्रों संग खिलखिलाना हमें सिखाते हैं।।
मित्र मंडली संग सबको स्नेह भरे रंग लगाने वाली-शिक्षिका, कवयित्री, लेखिका, समाजसेविका-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












