
सृष्टि में मानव जीवन मूल्यवान
कई धर्म के लोग रहना महान
इसे भिन्नव में एकता शक्तिमान
कुटुंब की तरह रहना आदर्शवान।
कभी कभी आता है कष्ट जीवन में
इसे लड़ने से मुश्किल होता जिंदा में
कभी कभी रिश्तों सताता है कुटुंब में
इससे मानसिक क्षोभा बढ़ता जीवन में।
देखते देखते कुछ व्यक्ति अमीर बनता है
और जीवन में उन्नत शिखर को पाता है
सब लोगों को आदर्श व्यक्ति बन जाता है
इससे हमारे रिश्तों में ईर्ष्या पैदा होता है।
रिश्तों की अभिशाप हमको नष्ट होता
इससे हमारे जीवन में विकास घटता
भविष्य में आगे बढ़ना रोक सकता
हमारे जीवन में लक्ष्य को न पहुंचता।
श्रीनिवास एन, आंध्रप्रदेश













