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मां का ऋण

मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं,
नौ महीना कोख में रख हर पीड़ा को सहा,
नन्ही कली आई आंगन में सौभाग्य बड़ा है पाया,
रातों कि नींद गंवाई आंचल में छिपाए दूध पिलाया,
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं।
हमको खाना खिलाकर खुद भूखी रह जाती,
कितने समर्पण किए मां आज ये आंगन सजाई,
तेरी ममता कि छांव कैसे भूल जाऊं,
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं।
कितने संघर्ष किए मां कितने ताने सहे,
कितनी दुखी हो आज भी आंखों में आंसू बहते,
तेरी परछाईं बनकर संस्कार तुझी से पाऊं,
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं।
हम तो ऋणी है आपकी मां इस दुनिया में लाया,
साथ जन्मों में न चूक पाए ऐसा पुण्य का काम किया,
मां तू रूह है मैं काया बन जाऊं,
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं।
एक बेटी अनंत सफर में चली गई,
तेरी ममता भी बिलख कर रोई थी,
उन बचपन कि घड़ियां याद कर अपने आप को संभाली थी,
तेरी नयन के बहते निर को कैसे रोकूं,
मां तूने जन्म दिया तेरा ऋण कैसे चुकाऊं।

नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़

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