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मजदूर

करता हूं रोज़ मजदूरी,
मेहनत करना मजबूरी।
बहाता हूं खूब पसीना,
मिलता जब कठिन निवाला।।
जितना जब जो मिल जाता,
उस में ही खुशियां मनाता।
सदा सुखी नींद सो पाता,
नहीं इच्छा बड़ी बढ़ाता।।
सभी चलता राम भरोसे,
फिर व्यर्थ काहे घबराना।
है काम मेरी बस पूजा,
इसको करते मुस्कुराना।।

रजनी सिंह
गाजियाबाद,उ.प्र.

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