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गुरु जौहरी प्रभु अपना हीरा


विधा:कविता

प्रभु अपना हीरा गुरू जौहरी ने खोज दिया।
प्रभु अपना चंदन गुरू ने जल में घोल दिया।

गुरू की कृपा से जीवन का अर्थ समझ आया।
प्रभु की महिमा को जानने का मार्ग मिल गया।

गुरू की दृष्टि ने जीवन का लक्ष्य दिखालाया।
प्रभु की भक्ति में जीवन को समर्पित किया।

गुरू की शिक्षा से जीवन का मार्ग सुधारा।
प्रभु की कृपा से जीवन का उद्धार हुआ।

गुरू की महिमा को जानने का अवसर मिला।
प्रभु की भक्ति ने जीवन को नए अर्थ से भर दिया।

गुरू जौहरी की दृष्टि ने, उस हीरे की पहचान कराई।
उस की चमक ने जीवन को रोशन कर दिखाई।

प्रभु जौहरी हीरा संत है,सृष्टि प्रकृति शृंगार।
बने सुपात्र प्रभु के लिए ,गढ़ता है गुरू कुम्हार।

प्रभु हीरा ही करता सदा,मानव का कल्याण।
औषधीय गुण के लिए ,बाँटे गीता का ज्ञान।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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