
अब ,मुझे नही सोना है
सिर्फ और सिर्फ जागते रहना है
सोने से बहुत डर लगता है
सपने मे खोये लोग आता है
नींद जब पूरे मदहोश मा रहता है
खोये लोग,मेरे जीवन का दिखता है
वैसे ही,जैसे सब से मिलते थे
खुशी और गम बांटंते थे
खट्टी मीठी बाते करते थे
बेवजह का भी मुस्कुराते थे
बात ना होते भी बतियाते थे
हरेक बातो को सजा कर सुनाते थे
हरेक बातो को,हाँ ही कहते थे
ना कि तो गुंजाइश ही न रखते थे
कितना अच्छा वो पल था ,हमारा
सारे जहाँ से वो था प्यारा
फिर एक दिन ऐसा मोड़ आया
मै या तो वो ही छोड़ आया
कुछ अहम् आया मेरे या उसमे
कुछ वहम् पाले उसने या हमने
फिर फासले बढते गये
अनजाने मे ही सही,सब घटने लगे
ना खुशियाँ बाटते ना गम
मिलना भी और बाते भी हुई कम
शनै शनै जिंदगी का सफर कटा
उनके राह से, काँटे जैसे हटा
वक्त भी बीत गया,अब लम्बी
उन्हे मान लिया,मैने दंभी
लेकिन दिल तो ,दिल न होता है
दिल मे बसे लोग,कहाँ हटता है?
दिमाग भी इसमे पीछे कैसे रहता
हर पल वो जो ,याद है करता
बस,इसी का तो यही परिणाम निकला
नींद मे भी उसी का,मुंह से नाम निकला
खुद मे ही,खुद को ही बडबडाया
ये हकीकत था,ये सपने मे दिखलाया
लेकिन हकीकत तो यही ही था
जैसे ही नींद आयी,चेहरा उसी का था
बार बार ये क्रिया चलती रही
हरेक बार नींद मे वो ही चेहरा रही
उलझन, सुलजता नही अब दिखता है
अब,सोने से ही डर लगता है
लोग पूछते है कि,,क्या हुआ है?
सोते नही आजकल,ऐसा सुना रहा है
कोई परेशानी है साझा करो
निदान जरूर निकाल देंगे, भरोसा करो
अब,चुन्नू कवि कैसे बतायेंगे उन्हे
असली माजरा क्या है?? हमे
बस,खामोशी से सुनकर सबकी बाते
कुछ नही है,कह टाल है देते
लेकिन खुद के मन मे कर लिया हूँ फैसला
सोना नही है,लेकिन बनाकर रखना है हौसला
यादे आये उसकी तो,आये खुली आंखो मे
सोने के बाद क्यों उसको हम,देखे दिमाग मे
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













