
एक बात बोलूं साहेब,भले शादी करने के लिए दो लोगों की जरुरत पड़ती है,
लेकिन प्रेम करने के लिए नहीं सिर्फ एक आदमी ही बहुत है मालूम है क्या है,
क्योंकि जो इंसान अपने आप से प्रेम करता है वह इंसान प्रेमआंन्द को पा लेता है
फिर उसे दुनियांदारी की जरूरत नहीं है वह स्वयं परमात्मा में लीन रहकर प्रेमानंद में मगन रहता है
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













